लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अचानक भूचाल ला दिया है। इस घटना के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक बेहद सख्त रुख अपनाया। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अगर यमन के हूती विद्रोही अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और जहाजों पर हमले जारी रखते हैं, तो इसका खामियाजा सीधे ईरान को भुगतना पड़ेगा। अमेरिका हूतियों को ईरान का प्रॉक्सी (सरोगेट) मानता है। इसलिए किसी भी नए हमले की सूरत में दोनों पर भारी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब लाल सागर में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलकर $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति लाइन के लिए लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप की इस चेतावनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका क्षेत्रीय संघर्ष में अब मध्यस्थ या केवल बचाव की मुद्रा में रहने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
लाल सागर में अचानक क्यों भड़का नया तनाव
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने के उद्देश्य से लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों—एनसेलिया (Encelia) और लैला (Layla)—को निशाना बनाया। इनमें से एक जहाज पर हमले के बाद आग लगने की खबर आई, हालांकि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित बताए गए।
हूतियों का तर्क है कि सऊदी अरब उनके खिलाफ एयर ब्लॉक लगा रहा है, जिसके जवाब में उन्होंने यह समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिका इसे सिर्फ एक बहाना मानते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि हूती विद्रोही ईरान के उकसावे में आकर अपनी ही मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
ट्रंप के कड़े बयान के पीछे की असली रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि एक साल पहले अमेरिका ने लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले रोकने के लिए हूतियों पर भीषण सैन्य हमले किए थे। उसके बाद से अब तक हूतियों ने काफी संयम दिखाया था और उनका रवैया अपेक्षाकृत समझदारी भरा था। लेकिन सऊदी जहाजों पर ताजा हमलों ने फिर से पुरानी स्थिति पैदा कर दी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की रणनीति को बेहद स्पष्ट कर दिया है:
- हूतियों के किसी भी दुस्साहस का जिम्मेदार सीधे तेहरान (ईरान) को माना जाएगा।
- केवल यमन में हूती ठिकानों पर बमबारी नहीं होगी, बल्कि ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को भी निशाना बनाया जाएगा।
- अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा अमेरिका की प्राथमिकता बनी रहेगी।
ईरान लगातार दावा करता रहा है कि हूती विद्रोही अपने फैसले खुद लेते हैं। लेकिन ट्रंप प्रशासन इस दलील को पूरी तरह खारिज करता है। वॉशिंगटन का मानना है कि हूतियों को हथियार, ड्रोन, मिसाइलें और खुफिया जानकारी सीधे ईरान से मिलती हैं।
वैश्विक तेल बाजार और भारत पर संभावित असर
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के करीब 7 प्रतिशत तेल व्यापार और भारी मात्रा में मालवाहक जहाजों की आवाजाही का मुख्य रास्ता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद बाब अल-मंदेब भी युद्ध के कारण बाधित होता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा जाएगी।
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: घटना के तुरंत बाद ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार चला गया। अगर सैन्य टकराव बढ़ा, तो यह कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
- मालभाड़ा और बीमा लागत बढ़ना: लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों का बीमा प्रीमियम कई गुना बढ़ चुका है। अधिकांश शिपिंग कंपनियां अब अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से जहाजों को भेज रही हैं, जिससे डिलीवरी में 10 से 14 दिन अधिक लग रहे हैं और लागत बढ़ रही है।
- भारत की चिंताएं: भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। महंगे तेल और बढ़े हुए मालभाड़े से भारत में आयात लागत बढ़ेगी, जिससे घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव बन सकता है।
क्या अमेरिका सच में बड़ा सैन्य हमला करेगा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी चेतावनी में "मेजर मिलिट्री पनिशमेंट" (बड़ी सैन्य सजा) शब्द का इस्तेमाल किया है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने हाल के हफ्तों में मध्य पूर्व में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख महज खोखली धमकी नहीं है।
अगर हूती विद्रोही सऊदी या अमेरिकी जहाजों को दोबारा निशाना बनाते हैं, तो अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ईरान के तटीय मिसाइल बेस, नौसैनिक संपत्तियों और कमांड सेंटरों को निशाना बना सकती हैं। ईरान ने भी जवाब में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है, जिससे इस बात का खतरा बढ़ गया है कि यह क्षेत्रीय तनाव एक बड़े सीधे युद्ध का रूप ले सकता है।
अगर आप वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार या अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर नजर रखते हैं, तो आने वाले कुछ दिन बेहद नाजुक हैं। लाल सागर में जहाजों की आवाजाही की स्थिति और अमेरिकी विदेश नीति के अगले कदमों को ट्रैक करना बाजार के रुझान को समझने के लिए बेहद जरूरी होगा।