एक बाइक पर पूरी दुनिया घूमने का सपना जब अचानक 12 साल के दुःस्वप्न में बदल जाए, तो कैसा महसूस होगा? ब्रिटिश नागरिक क्रैग फोरमैन और उनकी पत्नी लिंडसे के साथ ठीक यही हुआ है. ईरान की कुख्यात एविन जेल में बंद क्रैग को एक और करारा झटका लगा है. तेहरान की एक अदालत ने उनकी 10 साल की सजा को चुपचाप दो साल और बढ़ा दिया है. उनका गुनाह? सिर्फ इतना कि उन्होंने जेल की चारदीवारी से मीडिया के साथ बात की थी.
यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है. यह आज के समय की एक बेहद कड़वी और डरावनी हकीकत है. ईरान किस तरह से विदेशी नागरिकों को राजनीतिक सौदेबाजी के लिए मोहरा बनाता है, यह मामला उसका सबसे ताजा और क्रूर उदाहरण है.
कैसे एक साधारण सफर बन गया काल कोठरी का रास्ता
साल 2025 की शुरुआत में क्रैग फोरमैन और उनकी पत्नी डॉ. लिंडसे फोरमैन यूरोप से ऑस्ट्रेलिया के लिए एक रोमांचक बाइक ट्रिप पर निकले थे. वे दोनों कोई जासूस नहीं थे. क्रैग पेशे से बढ़ई हैं और लिंडसे एक लाइफ कोच व मनोवैज्ञानिक हैं. वे अपनी मोटरसाइकिल पर वैध वीजा, सरकार द्वारा स्वीकृत यात्रा कार्यक्रम और एक स्थानीय टूर गाइड के साथ ईरान की सीमा में दाखिल हुए थे.
लेकिन तेहरान प्रशासन को उनकी यह साधारण सी यात्रा भी मंजूर नहीं थी. जनवरी 2025 में उन्हें जासूसी के बेबुनियाद आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया. ईरान की खुफिया एजेंसियों ने दावा किया कि वे पर्यटन की आड़ में संवेदनशील जानकारी जुटा रहे थे. सच तो यह था कि लिंडसे अपने एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय लोगों से केवल यह पूछ रही थीं कि "एक बेहतर जिंदगी क्या होती है और इंसान होना क्या है." इसी सामान्य सी बात को ईरान के सुरक्षा बलों ने शासन को उखाड़ फेंकने की साजिश मान लिया.
बिना वकील और बिना अनुवादक की बंद कमरे वाली सुनवाई
फरवरी 2026 में तेहरान की क्रांतिकारी अदालत ने इस जोड़े को 10-10 साल जेल की सजा सुनाई थी. इस पूरी अदालती प्रक्रिया में मानवाधिकारों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं. ब्रिटिश संसद में भी इस पर चर्चा हुई थी जहां सांसदों ने खुलासा किया कि पूछताछ के दौरान लिंडसे से फारसी भाषा के कागजात पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए, जिन्हें वह पढ़ भी नहीं सकती थीं. उनसे कोरे कागजों पर अंगूठे के निशान लिए गए.
क्रैग के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया. उन्हें पूछताछ के दौरान आंखों पर पट्टी बांधकर घुमाया जाता था और जानबूझकर दीवारों से टकराया जाता था. उन्हें कई हफ्तों तक एकांत कारावास में रखा गया. जब अभी हाल ही में उन्हें अदालत ले जाया गया, तो उन्हें बताया गया था कि वे अपने वकील से मिलने जा रहे हैं. लेकिन वहां उन्हें सीधे एक जज के सामने खड़ा कर दिया गया और बताया गया कि मीडिया से बात करने के आरोप में उनकी सजा दो साल और बढ़ाई जा रही है. इस पूरी प्रक्रिया में न तो कोई वकील था, न कोई अनुवादक और न ही क्रैग को अपनी बात रखने का कोई मौका मिला.
भूख हड़ताल और जेल की वो भयानक रातें
मई 2026 से ही क्रैग और लिंडसे जेल में भूख हड़ताल पर हैं. उन्होंने यह कदम तब उठाया जब जेल प्रशासन ने उन्हें अपने परिवार से फोन पर बात करने से रोक दिया और आपस में मिलने पर भी पाबंदी लगा दी. उनके परिवार के मुताबिक, क्रैग का वजन लगभग 16 किलोग्राम कम हो चुका है और उनकी हालत बेहद नाजुक है. लिंडसे भी लगातार कमजोरी, चक्कर आने और शरीर में कंपन की समस्या से जूझ रही हैं.
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि यह मामला "राजनैतिक लाभ के लिए राज्य द्वारा बंधक बनाने" (state hostage taking) जैसा है. ईरान अक्सर पश्चिमी देशों पर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए विदेशी नागरिकों को जेल में ठूंस देता है और फिर कैदियों की अदला-बदली के सौदे करता है.
अब आगे क्या होना चाहिए
ब्रिटिश सरकार इस मामले पर लगातार ईरान से बातचीत करने का दावा कर रही है. लेकिन हकीकत यह है कि जब तक कूटनीतिक दबाव को बेहद कड़ा नहीं किया जाता, तब तक क्रैग और लिंडसे जैसे मासूम पर्यटकों की जिंदगी खतरे में ही रहेगी. ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को पहले ही सख्त चेतावनी दी हुई है कि वे ईरान की यात्रा बिल्कुल न करें.
अगर आप एक उत्साही यात्री हैं और दुनिया घूमने का शौक रखते हैं, तो ऐसे देशों की यात्रा करने से पहले सौ बार सोचें जहां कानून का राज नहीं बल्कि तानाशाही चलती है. क्रैग फोरमैन की यह कहानी हमें चेतावनी देती है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में कानून सिर्फ एक मुखौटा है, जिसके पीछे केवल क्रूर और स्वार्थी राजनीति छिपी है. ऐसे असुरक्षित देशों की यात्रा से हर हाल में बचें.